| विकिस्रोतातील पान क्र
|
ग्रंथ पृष्ठ क्रमांक
|
मजकुर/लेखनाव
|
ग्रंथातील लेख क्र.
|
लेखन
|
| १ ते ३
|
|
वाचनालय नोंदी
|
|
|
| ४ते ६
|
|
रिकामे
|
|
|
| ७
|
|
मुखपृष्ठ
|
|
|
| ८
|
|
प्रकशक माहिती
|
|
|
| ९ ,१०
|
|
प्रकाशकाची ग्रंथ सुची
|
|
|
| ११
|
|
खांडेकर ग्रंथ सूची
|
|
|
| १२
|
|
रिकामे
|
|
|
| १३ ते ५९
|
१ ते ४७
|
गोपाळ गणेश आगरकर (वि.स.खांडेकर लिखीत प्रस्तावना)
|
|
वि.स.खांडेकर
|
| ६०
|
४० *
|
रिकामे *(अकस्मिक पणे पृष्ठ ४० पासून ग्रंथातील पृष्ठ मोजणी पुन्हा
कशी चालू झाली आहे ते अनाकलनीय)
|
|
|
| ६१ ते ६८
|
४१ ते ४८
|
सुधारक काढण्याचा हेतू
|
१
|
गोपाळ गणेश आगरकर
|
| ६९ ते ७७
|
४९ ते ५७
|
आमचे दोष आम्हांस कधीं दिसूं लागतील ?
|
२
|
गोपाळ गणेश आगरकर
|
| ७८ ते ८४
|
५८ ते ६४
|
भारंतीय कलांचे पुराणत्व
|
३
|
गोपाळ गणेश आगरकर
|
| ८५ ते ९०
|
६५ ते ७०
|
सामाजिक घडामोडी
|
४
|
गोपाळ गणेश आगरकर
|
| ९१ ते ९५
|
७१ ते ७५
|
सुधारणा म्हणजे काय ?
|
५
|
गोपाळ गणेश आगरकर
|
| ९६ ते १०१
|
७६ ते ८१
|
करून कां दाखवीत नाहीँ ?
|
६
|
गोपाळ गणेश आगरकर
|
| १०२ ते १०६
|
८२ ते ८६
|
पांचजन्याचा हंगाम
|
७
|
गोपाळ गणेश आगरकर
|
| १०७ ते ११०
|
८७ ते ९०
|
आयर्लडाकडे पाहून तरी जागे व्हा
|
८
|
गोपाळ गणेश आगरकर
|
| १११ ते ११७
|
९१ ते ९७
|
कवि, काव्य, काव्यरति
|
९
|
गोपाळ गणेश आगरकर
|
| ११८ ते ११२
|
९८ ते १०२
|
भांडवल गेलें; व्यापार गेला
|
१०
|
गोपाळ गणेश आगरकर
|
| १२३ ते १२५
|
१०३ ते १०५
|
संतति व संपत्ति
|
११
|
गोपाळ गणेश आगरकर
|
| १२६ ते १३२
|
१०६ ते ११२
|
कै. विष्णु कृष्ण चिपळोणकर
|
१२
|
गोपाळ गणेश आगरकर
|
| १३३ ते १४०
|
११३ ते १२०
|
गुलामांचे राष्ट्र
|
१३
|
गोपाळ गणेश आगरकर
|
| १४१ ते १४४
|
१२१ ते १२४
|
काळजापर्यंत पोहोंचलेली जखम
|
१४
|
गोपाळ गणेश आगरकर
|
| 1४५ ते १४९
|
१२५ ते १२९
|
मूळ पाया चांगला पाहिज
|
१५
|
गोपाळ गणेश आगरकर
|
| १५० ते १५३
|
१३० ते १३३
|
आणखी एक_शहाण्याचा_कांदा
|
१६
|
गोपाळ गणेश आगरकर
|
| १५४ ते १८३
|
१३४ ते १६३
|
विविध विचार (खालील उप-क्रमांकानुसार)
|
१७
|
गोपाळ गणेश आगरकर
|
| १५४
|
१३४
|
सुधारक सत्याग्रही असतो.
|
१७.१
|
गोपाळ गणेश आगरकर
|
| १५५
|
१३५
|
मलमपट्यांनी रोग बरे होत नाहीत
|
१७.२
|
गोपाळ गणेश आगरकर
|
| १५६
|
१३६
|
केल्यानें होत आहे रे
|
१७.३
|
गोपाळ गणेश आगरकर
|
| १५६
|
१३६
|
आजची सामाजिक असमता
|
१७.४
|
गोपाळ गणेश आगरकर
|
| १५८
|
१३८
|
जसा समाज तसा राजा
|
१७.५
|
गोपाळ गणेश आगरकर
|
| १६०
|
१४०
|
हिंदुधर्माला लहोंनेशी नोटिस
|
१७.६
|
गोपाळ गणेश आगरकर
|
| १६१
|
१४१
|
भागुबाईची वीरश्री
|
१७.७
|
गोपाळ गणेश आगरकर
|
| १६२
|
१४२
|
म्हणे जात कां करीत नाहीं ?
|
१७.८
|
गोपाळ गणेश आगरकर
|
| १६४
|
१४४
|
पायावांचून कळस उभारणारे शहाणे
|
१७.९
|
गोपाळ गणेश आगरकर
|
| १६६
|
१४६
|
फुंकरांनी भडकणारी ज्वाला
|
१७.१०
|
गोपाळ गणेश आगरकर
|
| १६८
|
१४८
|
बोलके सुधारक कांहीं नवीन नाहीत
|
१७.११
|
गोपाळ गणेश आगरकर
|
| १६९
|
१४९
|
कैद्याविषयीचे समाजाचे कर्तव्य
|
१७.१२
|
गोपाळ गणेश आगरकर
|
| १७०
|
१५०
|
मातृभाषा हॅच शिक्षणाचे खरें माध्यम !
|
१७.१३
|
गोपाळ गणेश आगरकर
|
| १७१
|
१५१
|
ऐसें कैसें रे सोवळे
|
१७.१४
|
गोपाळ गणेश आगरकर
|
| १७३
|
१५३
|
धिक् तुमची विद्या
|
१७.१५
|
गोपाळ गणेश आगरकर
|
| १७५
|
१५५
|
आमची अन्नान्न दशा
|
१७.१६
|
गोपाळ गणेश आगरकर
|
| १७६
|
१५६
|
खरा सुधारक
|
१७.१७
|
गोपाळ गणेश आगरकर
|
| १७७ ते १८३
|
१५७ ते १६३
|
महाराष्ट्रीयांस अनाव्रत पत्र
|
१७.१८
|
गोपाळ गणेश आगरकर
|
| १८४
|
१६४
|
प्रकाशक आगामी ग्रंथ सूची
|
|
|
| १८५ ते १८९
|
१६५ ते १६९
|
रिकामे
|
|
|