या पानाचे मुद्रितशोधन झालेले आहे
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| देशाचे नाव | दर चौरस मैली माणसे | १९२० नंतर मोजलेली लोक सं. | लाकसंख्या १८०० साली | लोकसंख्या १९१० साली | |
|---|---|---|---|---|---|
| कोटी | लक्ष | ||||
| इंग्लंड व वेल्स | ६४९ | ३ | ७८ | ९० लक्ष | ३ कोटी ७८ लक्ष |
| जपान | ४१३ | ६ | ५० | ||
| जर्मनी | ३४६ | ७ | ० | २।।। कोटी | ६॥ कोटी |
| इटली | ३४६ | ४ | ११ | १।।। कोटी | ३ कोटी |
| फ्रान्स | १९८ | ४ | १८ | ||
| हिदुस्थान | १९५ | ३५ | २८ | ||
| अमेरिका | ४५ | १२ | २७ | ६ लक्ष | ९। कोटी x |
| अफगाणिस्थान | २४ | ० | ६३ | ||
| रशिया (सैबेरिया धरून) | १९ | १६ | १० | ४ कोटी | १४ कोटी |
| इराण | १३५ | ० | ९० |
x अमेरिकेत बाहेरून लोक पुष्कळ येतात. म्हणून हे वाढीचे प्रमाण धरता येणार नाही.
लोकसंख्या कमी होत आहे, अशी तक्रार करताना दर चौ. मैली अमुक एक लोकसंख्या असलीच पाहिजे, असे जणू काही आधी ठरवून ते लोक लिहीतात' असे वाटते. पण मनांत नक्की ठरविणे काहीच शक्य नाही. कारण इंग्लंडप्रमाणे ६४९ असावी, का जर्मनीप्रमाणे ३४६ असावी, का अमेरिकेप्रमाणे ४५ असावी. याचे उत्तर कसे देणार ? कार साँडर्स हा नियमनाचा कट्टा पुरस्कर्ता आहे. त्याने सांगितले आहे की सायन्सच्या प्रगतीच्या विशिष्ट पायरीला लोकसंख्येचे एक विशिष्ट प्रमाण आवश्यक आहे. त्याहून कमी किंवा जास्त चालणार नाही. कमी झाले तर ती सायन्सची उभारणी लोकांना पेलणार नाही व परागती होईल. जास्त झाले तर सरासरी माणशी उत्पन्न