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रामदासवचनामृत
भाग दुसरा.
| ६. जुना दासबोध. | ||||
| क्रमांक | पृष्ठ | |||
| ८५. | देह पडे कां देव जोडे! | |||
| जु. दा. ७.१३-२१ | १५३ | |||
| ८६. | प्रपंचपरमार्थ. | |||
| जु. दा. ११.५४-६० | १५४ | |||
| ८७. | अनुभव सांगू नये. | |||
| जु. दा. १५:३७-४६ | १५४ | |||
| ८८. | रामास मागणे. | |||
| जु. दा. १६:१-१७ | १५५ | |||
| ७. मनाचे श्लोक. | ||||
| ८०. | मनास प्रार्थना. | |||
| म. श्लो. (२१) | १५७ | |||
| ८. पंचसमासी. | ||||
| ९०. | स्वरूपानुसंधान. | |||
| पं. स. ४.१८-३० | १६१ | |||
| ९१. | सर्वत्र रामदर्शन. | |||
| पं. स. ५.५-३३ | १६२ | |||
| ९. मानपंचक. | ||||
| ९२. | रामराज्य. | |||
| मा. पं. १.७-२५ | १६३ | |||