हे पान प्रमाणित केलेले आहे.
४
अनुक्रमणिका.
| नारूंना लावणें- कुणब्याचा व्यवहार रोकडीचा व रोखीचा झाला पाहिजे- खेड्यांतील शिक्षण. मुरलेल्या व नवशिक्या गुन्हेगारांचें शिक्षण, आणि शिक्षा-मुक्त गुन्हेगारांना मदत-पुढील काम. पानें २५८-२७८.
| ||
| पुरवणी- | महायात्रा | -प्रयागवाळ- गंगापुत्र- गयावाळ ह्यांचे त्रिकूट-यात्रा-दलाल- दाक्षिणात्य व गंगापुत्र ह्यांचा बेबनाव- तीर्थोपाध्याय वतनवृत्तीचें नासकं फळ-तीर्थाची आरोग्यनाशक स्थिति- भिक्षुकीचा अतिरेक- रेल्वेवरील त्रास, हमालांचा अधाशीपणा- उतारूंच्या पळत्या पिकावर सर्वांचा डोळा- कुपथ्यकर व महाग शिधा- उपाय. पानें २७९-२९५.
|
शुद्धिपत्रक
----------
| पान | ओळ | अशुद्ध | शुद्ध |
| १९ | २ | दहा हजार | एक लाख |
| २९ | ७ | वगैरे | वगैरे नांवे पडली |
| ३७ | १६ | राजाकडून | राजाकडून१ |
| ५९ | ३ | रांगेने | रगेने |
| ६० | १३ | साख्य | सौख्य |
| १६६ | १ | वेषाने | पेषाने |
| १७२ | ६ | ताब्यात घेतलें | राखून ठेवले |
----------