वाहत्या वाऱ्यासंगे
"
तरुणाईच्या उंबरठ्यावर
आकाशमोगरी ... सोनकणीस ...
मेंदीत झुलणारे मन
जगाचे अनुभव घेता घेता
सामान्य स्त्रीच्या हृदयातील
घुंगटबद्ध जखमांचा शोध घेऊ लागले.
तिच्यातील माणूस म्हणून जगण्याची
धडपड ... जिद्द ... आस
शोधू लागले
या प्रवासाची शब्दांकित क्षणचित्रे ...
म्हणजेच
'वाहत्या वाऱ्यासंगे'
"
ISBN-81-87104-40-7
'वाहत्या वाऱ्यासंगे' (ललित लेख )
प्रथमावृत्ती - जून १९९८
| © प्रा. शैला लोहिया मनस्विनी/ मानवलोक/ ३२, किनारा, विद्याकुंज कॉलनी, अंबाजोगाई- ४३१ ५१७ जि. बीड फोन. नि. (०२४४६) ४७०१६ |
मुद्रक प्रकाशक डॉ. सौ. निर्मला सारडा, ग्रंथविशेष प्रतिष्ठान ८५७ शनिवार पेठ. सातारा ४१५ ००२ मुद्रणस्थळ - प्राकृती प्रिंटर्स, सातारा |
| साठ रुपये |
अर्पण पत्रिका
जीवनाचा रंगमंच अनुभवण्यासाठी भरारणाऱ्या मनाला
आई पपांनी कधी बेड्या घातल्या नाहीत .
आणि
इकडच्या धरीही सुसराजी नि सासूजींनी
आडवे वांध न घालता समता दिली.
मोठे दीर भाऊसाहेव यांनी तर
माझ्या लेखनाचं प्रचंड कौतुक केलं.
आज हे कुणीच हयात नाहीत.
पण त्यांच्या आठवणी मात्र
सतत सोबतीला आहेत.
त्या
सुश्री शकुंतला , ॲड. शंकरराव परांजपे.
सुश्री सुमकावाई, श्री. शालिग्रामजी लोहिया .
ॲड, भगवानदासजी लोहिया
यांना आदरपूर्वक अर्पण
- शैला लोहिया
| १. | सेवादलाचा संस्कार | ११ |
| २. | उमलतीचे रंग , गंध | १९ |
| ३. | रेल्वेच्या डव्यातील आत्मा | ३० |
| ४. | मोहसिनाची सल | ३६ |
| ५. | फुंकर | ४० |
| ६. | उत्तरांच्या शोधातले प्रश्न | ४५ |
| ७. | बेशरमीची झाडं | ४९ |
| ८. | जांभूळ झाडाखाली | ५७ |
| ९. | मेंदी | ६१ |
| १०. | आपाढातला एक दिवस | ६५ |
| ११. | हा भाद्रपदाचा महिना | ६८ |
| १२. | आंब्याच्या कोयीवरून घसरताना | ७३ |
| १३. | शारदा, कमला अन स्त्रीमुक्ती वर्पही ! | ७७ |
| १४. | सोनकणीस | ८२ |
| १५. | आकाशमोगरी | ८५ |
| १६. | अधुऱ्या स्वप्नांची अक्षय वेल | ८८ |
| १७. | आजीच्या प्रेमाची गोडी | ९२ |
| १८. | हा वसंत रंग भरित | ९६ |
| १९. | मी युग विरहिणी | १०१ |
| २०. | आई : साधीसुधी तरीही असामान्य | १०४ |