पान:वाचन (Vachan).pdf/१३९

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ब) हिंदी

प्रांजलधर/अमिय बिंदु -

■ किताबे पढ़ना, उड़ने के समान आनंद देता है । कल्पना की दुनिया में,विचारों की दुनिया में, भावों की दुनिया में, और सबसे बढ़कर सूचनाओं की दुनिया में आप मुक्त होकर उड़ने का अनुभव ले सकते है।

भारतेंदु हरिश्चन्द्र -

■ घड़ी, छड़ी, चश्मा भये, छन्निन के हथियार।

कुष्णकुमार -

■ हमारी आज की स्कूली शिक्षा व्यवस्था या तो परीक्षार्थी बनाती है या बहुत साक्षर बनाती है । वह पाठक नहीं बनाती किसी को ।

शंभुनाथ

■ किताब की जरुरत तब तक बनी रहेगी, जब तक समाज के लोगों में प्रश्न करने, सन्देह करने का जज्बा है।

■ पुस्तकें है तो तर्क है, अनुभूति है, और आजादी की बाकी लड़ाई है।

■ पढ़ना, स्वाधीन होना है, जिसका कोई विकल्प नहीं।

■ एक अच्छे लेखक की किताब पढ़ना, इस जीवन-विरोधी माहौल में जीवन में लौटना है।


वाचन/१३८