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| विषय. | पान. | विषय. | पान. | ||
|---|---|---|---|---|---|
| १ शृंगार. ... | ... | ६० | ५ चित्र. ... | ... | ८२ |
| संभोग. | ... | ६० | अर्थालंकार. | ... | ८३ |
| विप्रलंभ. | ... | ६२ | १ उपमा. ... | ... | ८३ |
| २ वीर. ... | ... | ६५ | २ रुपक. ... | ... | ८५ |
| ३ करुण. ... | ... | ६६ | ३ उत्प्रेक्षा. ... | ... | ८५ |
| ४ रौद्र. ... | ... | ६८ | ४ दृष्टांत. ... | ... | ८६ |
| ५ हास्य. ... | ... | ६८ | ५ निदर्शना. | ... | ८६ |
| ६ भयानक. | ... | ७१ | ६ विशेषोक्ति. | ... | ८७ |
| ७ बीभत्स. | ... | ७२ | ७ व्याजस्तुति. | ... | ८७ |
| ८ अद्भुत. ... | ... | ७३ | ८ स्वभावोक्ति. | ... | ८८ |
| ९ शांत. ... | ... | ७४ | भाषासरणि. | ... | ९० |
| अलंकारविचार. | ... | ७६ | सरला. | ... | ९० |
| शब्दालंकार. | ... | ७६ | ललिता. | ... | ९१ |
| १ अनुप्रास. | ... | ७७ | सरसा. | ... | ९३ |
| २ यमक. ... | ... | ७८ | मधुरा. | ... | ९५ |
| ३ श्लेष. ... | ... | ८० | प्रौढा. | ... | ९६ |
| ४ वक्रोक्ति. | ... | ८० |
सूचनाः - पान ६० चे शेवटीं "ह्यांत स्थायीभाव रति आहे.” असें वाचावें.