हे पान प्रमाणित केलेले आहे.
| ०१ | आढावा दहा वर्षांच्या राजकारणाचा | ०९ |
| ०२ | लोकसभेची मध्यावधी निवडणूक आणि शेतकरी संघटना | १७ |
| ०३ | 'भारत'भूमीला वाफसा आला आहे | २९ |
| ०४ | पाटी पुसली, आता पुढे | ३९ |
| ०५ | मागणं लई नाही | ४५ |
| ०६ | मध्यममार्गी पंतप्रधान | ४९ |
| ०७ | स्वतंत्र भारताचे नैतिक दर्शन | ५६ |
| ०८ | काँग्रेसला पर्याय नाही? | ६३ |
| ०९ | लोकसभा निवडणुका १९८९ | ७२ |
| १० | अपात्र नेत्यांनी मांडलेली जनतेची अग्निपरीक्षा | ७८ |
| ११ | पंचायत राज निवडणुका व शेतकरी महिला आघाडी | ८४ |
| १२ | देशाला वाचविण्यासाठी | ९२ |
| १३ | खाईच्या धारेवर असलेल्या देशातील जनतेला धोक्याचा इशारा | १०५ |
| १४ | खाईच्या धारेवर, मतपेटीच्या समोर! | १११ |
| १५ | इति अटलबिहारी प्रकरणम् | १२१ |
| १६ | नाही, पंतप्रधानसाहेब! | १२८ |
| १७ | कांदाफेकीचे मर्म | १३१ |
| १८ | मेंढरे नव्हे, माणसे म्हणून जगा | १४० |
| १९ | संकटाची चाहूल देणारा जाहीरनामा | |
| (स्व. भा. प. जाहीरनामा लेखांक: १) | १४८ | |
| २० | स्थिर सरकार चांगले की आघाडीचे? | |
| (स्व. भा. प. जाहीरनामा लेखांक : २) | १५४ | |
| २१ | राखीव जागांविषयी भ्रम (स्व. भा. प. जाहीरनामा लेखांक : ३) | १६२ |
| २२ | स्त्रियांसाठी राखीव जागा (स्व. भा. प. जाहीरनामा लेखांक : ४) | १७० |